Tuesday, 10 April 2012

आज अब भी कुछ  शेष  है ,यह
पल भी अब बीत रहा है ,कुछ दे रहा कुछ छीन रहा है ,कुछ यादों को समेट रहा ,कुछ बातों को बोल रहा ,कुछ उमंगों को तलाश रहा ,इसी समय की रेखा मे बंधे हुए सब यादों को देख रहा और धुध  रहाक्या पाया क्या छुट गया 

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